महाशिवरात्रि – बसंत श्रीवास

शिवरात्रि, महाशिवरात्रि,
केवल नही ये त्योहार है ।
चढ़ाके चिलम पी के भांग,
न उपासना का आधार है।।1।।
शिव के महिमा अपरंपार,
शिवभक्तों के पालन हार है ।
असुरों का करके संघार,
शिव करते सबका उध्यार है।।2।।
करले भक्ति शिव चरणों में,
मन से ले के शिव का नाम।
श्रद्धा सुमन शिव को अर्पण,
सुख शान्ति मिले आठो धाम।।3।।
शशि शेखर गंग बिराजे,
सजे गल नाग की माला।
अनाथों के है नाथ भोले,
त्रिशूल धारी डमरू वाला।।4।।
बिल्वपत्र पुष्प अकवन हार,
निर्मल जल के धार गिराय ।
कनक फल स्वीकारे शम्भू,
तीनो लोक के सुख पाय।।5।।
हैं आशुतोष कैलाशी शिव,
शिव सत्य शिव शक्ति अनंत ।
हे विषधारक सुखराशी शिव,
शिव अनादी है, शिव भगवंत ।।6।।
कोमल चित्त कृपालु शिव,
हैं ध्यान मग्न वैरागी शिव ।
भस्मरागाय महेश्वराय शम्भु,
सहस्त्र कला निधानी शिव ।।7।।
कृष्ण पक्ष मास चतुर्दशी,
बार एकादस शिवरात्रि।
मिलेंगे भोले आठो कॉल,
द्वादश मास महाशिवरात्रि।।8।।
- बसंत श्रीवास (नरगोड़ा)
रामकृष्ण मिशन आश्रम, नारायणपुर




