मनोरंजन
अनंत चौदस – डॉ क्षमा कौशिक

गणपति आये खुशियाँ छाई।
घर-घर दस दिन बजी बधाई।
ढोलक वाद्य बजी शहनाई।।
स्वागत भक्त करें हरसाई।।
पंडालों में धूम मची है।
लंबोदर छवि खूब सजी है।।
मोदक का सब भोग लगाते।
दूब चढ़ा कर शीश नवाते।।
करते प्रथम तुम्हारा वंदन।
हे शंकर-गौरा के नंदन।।
मूषक की तुम करो सवारी।
बुद्धि तुम्हारी विस्मयकारी।।
रिद्धि सिद्धि के तुम हो दाता।
तुम हो सबके भाग्य विधाता।।
विघ्न विनाशक पातक हर्ता।
तुम ही जग के पालन कर्ता।।
समय पूर्ण अब करे विदाई।।
फिर आना कहते चित लाई।।
विकल हृदय अँखियाँ छलकाई।
मंगल मूरत हृदय बसाई।।
– डॉ क्षमा कौशिक,
देहरादून , उत्तराखंड




