मनोरंजन
तेरा साया है हम – श्याम कुंवर भारती

तुम याद करो न करो मुझे गुजरे लम्हे याद आ ही जाते है।
भूल जाऊं मैं तुमको कैसे सोए अरमां जाग ही जाते हैं।
दिल मेरा पत्थर का नहीं तेरे जैसा जो पिघलता ही नहीं ।
फट कर घाव दिल बनके आंसू आंखों में आ ही जाते हैं।
किया है इश्क तुझसे चाहेगा दिल तुझको सांस आखिरी।
चाहा तूने नाम न लोगे मेरा मगर लबों तक आ ही जाते हैं।
पूछता है कोई देखा है चांद मैं तेरा ही नाम लेता हूं सबसे ।
लाख छिपाओ हुस्न पर्दे अपना दमक चेहरे आ ही जाते हैं।
करके प्यार भारती तुम न छोड़ जाओ मुझे दिल तोड़ के।
जाओगे तुम जहां बन के ख्वाब हम पास आ ही जाते हैं।
– श्याम कुंवर भारती , बोकारो, झारखंड




