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अन्तिम अभिलाषा – डॉ अनमोल कुमार

मरने के बाद भी काम आ जाऊं,

ये मेरी आखिरी अभिलाषा है।

राख बनकर बिखरने से पहले,

किसी के काम आ जाना चाहता हूं।

 

मेरी आंखें किसी अंधे को रौशनी दें,

मेरा दिल किसी की धड़कन बन जाए।

मेरे हाथ किसी की मदद करें,

मेरे अंग किसी का जीवन बचाएं।

 

न मेरा नाम, न मेरा चेहरा,

बस मेरी देह से कोई जी जाए।

यही सबसे बड़ा दान है,

यही सच्ची विदाई है।

 

जीवन में इंसान बनकर जिया,

मरकर भी इंसानियत निभा जाऊं।

देहदान – जीवन के बाद भी जीवन

– डॉ अनमोल कुमार, मोकामा, पटना (बिहार)

 

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