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इगास – डॉ क्षमा कौशिक

लौटे हैं श्री राम देर से पाती आई।
हिय में भर उल्लास सभी ने खुशी मनाई।।
एकादशी हरिबोधिनी इसको कहते हैं।
शुभविवाह तुलसी का सब इस दिन करते हैं।।
वृत्तासुर का अंत हुआ विजयी सब सुर थे।
योग-नींद से जाग उठे श्री विष्णु हरी थे।।
एकादश: दिन बाद दिवाली यह आती है।
बूढ़ी दीवाली इगास यह कहलाती है।।
– डॉ क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड




