ईश्वर के नाम पत्र (हास्य) – सुधीर श्रीवास्तव

utkarshexpress.com – मानवीय मूल्यों का पूर्णतया अनुसरण करते हुए यह पत्र लिखने बैठा तो सोचा कि सच्चाई के पथ पर एक बार मैं भी तो चलूँ। उससे भी पहले अपने स्वभाव की औपचारिक परंपरा का निर्वहन करते हुए पूरी तरह सौ प्रतिशत स्वार्थवश आपके चरणों में दिखावटी शीश भी झुका रहा हूँ, ताकि आप कुपित होकर भी मेरा अनिष्ट करने की सोचो भी मत।क्योंकि आप मानव तो हो नहीं, ये अलग बात है कि प्रभु जी! आप आज भी पुरानी विचारधारा में मस्त हो।अरे अपने कथित महल /कुटिया /धाम से बाहर निकलिए, तब देखिए कि दुनियाँ और हम मानव कहाँ तक पहुँच गये हैं, कितना विकास कर लिया है। मगर सबसे पहले एक मुफ्त की सलाह है कि बस अब लगे हाथ एक एंड्रॉयड मोबाइल ले ही लीजिए, बैठे बैठे सारी दुनियां का समाचार लीजिए, कुछ चैट शैट कीजिये, अपना एक यूट्यब चैनल बनाइए, पलक क्षपकते ही किसी से बातें करिए।कारण कि अब पत्र लिखना भी छूट ही गया है,पोस्टकार्ड से भी कम कीमत में झट से बात करो, तनावों से बचिए।यही हमारी सोच है। काश! आपके पास ये सुविधा होती तो वीडियो काल से आपको यहाँ का सीधे नजारा दिखाता।
………….।ओह अब समझा आप परेशान क्यों हैं?
अरे प्रभु, ये क्या बात हुई आप सबकी खबर रखते हो, पर जुगाड़ तंत्र को नहीं समझते। बस आप मेरे यार यमराज को अपनी इच्छा भर बताइये, फिर देखिये मोबाइलों के ढेर लग जायेंगे। मगर आप हैं कि बस…………।
और हाँ एक राज की बात भी कहनी है आपके पास मोबाइल भले नहीं है पर मेरे मित्र यमराज जी तो आये दिन नये नये महँगे मोबाइलों से खेल रहे हैं। तभी तो कोरोना में उनकी कार्य पद्धति एकदम बदली-बदली सी दिखी। चैंटिंग में इतना मस्त रहने लगे हैं, कि बस पूछो मत।
वैसे तो प्रभु ये इधर-उधर की बातें करना अच्छा तो नहीं लगता पर क्या करूँ, मजबूरी है, आखिर आपका ही बनाया हुआ बेवजह का इंसान जो हूँ।
कोई बात नहीं प्रभु! अब मेरे यार यमराज को आप ही सँभालना। क्योंकि यमराज की गिद्ध दृष्टि भी हमारे आपके संबंधों पर है। फिर जब हम आपके सीधे संपर्क में हैं तो मेरा विचार है कि यमराज जी मेरा नुकसान करने से पहले आपकी मान प्रतिष्ठा का ख्याल करें न करें, अपने इस प्रिय मित्र से मित्रता का ख्याल तो जरूर रखेंगे।
………….सो गये क्या प्रभु? ये पत्र चीज ही ऐसी है कि हंसाती, रुलाती, सुलाती भी है।मतलब आप बोर हो रहे हैं।
कोई बात नहीं मैं ही प्रिय यमराज से सीधे फोन पर बात कर लूँगा, कि जब वे हमारे क्षेत्र में आयें, तो हमारे साथ चाय पीकर ही जायें, जिससे मैं आपके लिए सिम सहित मोबाइल भेज सकूँ, अनलिमिटेड काल, डाटा की सुविधा के साथ।
बस प्रभु! मुझे भी नींद आने लगी है। अब बंद करता हूँ अब तो फोन पर ही बात करुँगा।तब तक के लिए विदा।जय हो प्रभु ।मेरा कल्याण हो आपकी ओर से मेरे लिए फिलहाल इतना ही।
भविष्य में आपको होने वाली तमाम असुविधाओं के लिए हमें दिल से शुभकामनाओं सहित खेद है।
धरती पर आपका सबसे बड़ा शुभचिंतक और यमराज मित्र। – सुधीर श्रीवास्तव, गोण्डा, उत्तर प्रदेश




