मनोरंजन
करवा चौथ – अशोक यादव

ओ! प्रिय, सुन साजन, सजनी क्या कहती है?
तुम्हारे प्यार भरे दिल में, मेरी तस्वीर रहती है।।
प्रेम मन में जाग उठा, प्रेम तुमसे करने लगी।
प्रेम अमृत जीवन रस, प्रेम आशा फिर जगी।।
हाथों में रची है मेहंदी, पैरों में रची है महावर।
कलाई में सजी चूड़ियाँ, बिंदी पुकारे प्रियवर।।
ईश्वर के समीप रहना है, संयम से होगी भक्ति।
तेरे लिए ही उपवास हूँ, चंद्रदेव देंगे मुझे शक्ति।।
तेरा ही नाम ले-लेकर, प्रेम माला मैं जपती हूँ।
दीर्घायु हो पति परमेश्वर, प्रभु से वर माँगती हूँ।।
शिव, गौरी, गणेश, कार्तिकेय की पूजा करूँगी।
तन-मन, ध्यान से, करवा माता की कथा सुनूँगी।।
देख कर कलानिधि को, छलनी से देखूँगी तुझे।
सौभाग्यवती, सुहागन का आशीर्वाद देना मुझे।।
– अशोक कुमार यादव, मुंगेली, छत्तीसगढ़




