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करें सत्कर्म – सुनील गुप्ता

( 1 ) करें सत्कर्म
सतत निरंतर,
चलें करते, श्रीहरि को अर्पित !!
( 2 ) यज्ञ कर्म
निष्काम करते,
रहें सदैव, यहाँ पर प्रसन्नचित्त !!
( 3 ) कर्म हमारे
अकर्म बनें,
जब करें, श्रीप्रभु को समर्पित !!
( 4 ) कर्म अकर्म
बनें विकर्म,
जब फल इच्छा से, हों रहित !!
( 5 ) वेदविहित कर्म
सच्चे सत्कर्म,
होते कल्याणकारी और धर्मनिहित !!
– सुनील गुप्ता (सुनीलानंद), जयपुर, राजस्थान




