कविता (पुलिस सिपाही) – जसवीर सिंह हलधर

हमारी सुरक्षा करें जो सिपाही ,बनाने लगे लोग उनको निशाना ।
कभी हाथ टूटा कभी माथ फूटा ,न कर्तव्य छोड़ा,न खोजा बहाना ।।
कड़ी धुप में जो बहाए पसीना ,खड़ा चौक पर ध्यान रखता हमारा ।
अगर भीड़ हमला करे उग्र होकर , खड़ा भीड़ में वो न खोजे सहारा ।
सदा ध्येय उसका हमारी सुरक्षा,मिले ना कभी वक्त पर आब दाना ।।1
सभी जानते हैं कि दौरे जहां में ,सियासत हुई आज मीठा बतासा ।
बना के बहाना किसी बात का भी ,करें रोज सड़कों पे खूनी तमाशा ।
बहुत काम जोख़िम भरा है पुलिस का , न सरकार सोचे न देखे जमाना ।।2
न जागे अभी तो बड़ी देर होगी , मनोबल अगर छोड़ देगा सिपाही ।
समय है अभी और सुविधा बढ़ाओ,अगर ये हुआ रूष्ट होगी तबाही ।
नए दौर में देश चलने लगा है , चलेगा नहीं आचरण ये पुराना ।।3
न कमज़ोर उसको समझ वार करना ,सजग है बहुत ही सिपाही हमारा ।
उठाओ न पत्थर जलाओ न गाड़ी , सुबह जेल में क़ैद होगा दुलारा ।
बहुत ही बड़े हाथ कानून के हैं , पिटोगे बहुत जेल होगी ठिकाना ।।4
– जसवीर सिंह हलधर देहरादून




