कोई नहीं मिला इतना वफ़ा – गुरुदीन वर्मा

कोई नहीं मिला इतना वफ़ा, विश्वास जो उसपे करकै।
उसको पुकारे आवाज देकर, या फिर बुलाये चिट्ठी लिखकै।।
कोई नहीं मिला इतना वफ़ा——————।।
जिनको हमने अपना समझकर, दिल से सच्चा प्यार किया।
खुशियां लुटाई उनके लिए, बर्बाद हमने खुद को किया।।
अपने लहू से चमन वो सींचा, चुभोता है काँटे वो नश्तर बनकै।
कोई नहीं मिला इतना वफ़ा——————।।
माना जिसको हमने देवता, पूजा की जिसकी ईश्वर समझ।
मंदिर बनाया जिसके लिए, मुकद्दर का जिसको खुदा समझ।।
लेकिन उन्होंने सौदा किया, इंसाफ का सौदागर बनकै।
कोई नहीं मिला इतना वफ़ा——————।।
अगर मतलबी अब हम बन गए, सबसे अलग क्या पाप किया।
भूल गए गर अपने धर्म को, यहाँ अधर्म किसने नहीं किया।।
किसने दुहा की हमारे लिए, गुहार करूँ जो उसको झुककै।
कोई नहीं मिला इतना वफ़ा—————–।।
जब आये दिन मेरी मुफलिसी के, अपने ही दुश्मन अब हो गये।
मुझको शरण यहाँ नहीं दी किसी ने, अनजान मुझसे सब हो गये।।
किसकी राह मैं यहाँ निहारूँ, मंजिल को जाता कदम रोककै।
कोई नहीं मिला इतना वफ़ा——————।।
– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद
तहसील एवं जिला- बारां (राजस्थान)




