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कौन सो माटी से रच्यौ तुझको रचनाकार – अनुराधा पाण्डेय

कृश कटि मांसल देह पर, लिपटी वर्तुल सार।
ज्यों सैकत शय्या बिछी, क्षीण गङ्ग की धार।।
दुग्ध धवल श्वेतांगना, उरझे कारे केश।
मधुरे!पावन प्रीत का, जैसे हो उन्मेष।।
ज्योतिर्धर कवि धर समसि, दे यौवन-विस्तार।
कर नख शिख वर्णन विशद, री! अतुल्य श्रृंगार।।
युग्म अधर आसव धुले, विनय पत्रिका नैन।
मङ्गल लग्न बिचारते, कविगण अपने बैन।।
– अनुराधा पाण्डेय, द्वारिका दिल्ली




