मनोरंजन
खुशियों की झड़ी – डॉ. सत्यवान सौरभ

बचपन की प्यारी मस्ती,
हँसी में छुपी खुशबू।
दोस्तों संग खेलते हैं,
हर दिन हो नया धूम।
बारिश की बूँदों में,
कागज़ की कश्ती दौड़ाए।
धूप में छाँव ढूंढ़े,
फूलों से रंग छुपाए।
नन्हे हाथों में हो प्यार,
हर दिल में हो मिठास।
मिलकर बनाएं ये जहाँ,
खुशियों की हो झड़ी खास।
– डॉ. सत्यवान सौरभ, उब्बा भवन,
आर्यनगर, हिसार (हरियाणा)-127045




