Uncategorized
ग़ज़ल – ऋतुबाला रस्तोगी

पास आना दूर जाना बेकली क्या चीज़ है?
लौटकर आना वहीं यह बेबसी क्या चीज़ है?
टूट कर चाहा जिसे वो बेवफा क्यों कर हुआ,
जान लेना चाहिए सच बेरुख़ी क्या चीज़ है?
टूट कर बिखरो कभी उस आइने की शक्ल में,
जान पाओगे तभी यह दिल्लगी क्या चीज है?
तोड़कर वादा चलो तुम खुश रहो है यह दुआ,
याद रक्खेंगे तुम्हें भी आशिकी क्या चीज़ है?
बेवजह जब बोझ सी लगने लगे हर सांस भी,
है कठिन मरना अगर यह जिंदगी क्या चीज है?
राह देखेंगे तुम्हारी,जान देकर किश्त में,
और पूछेंगे बताओ ख़ुदकुशी क्या चीज़ है?
जो उठा दे अर्श तक फिर ला पटकती फर्श पर
जानता है कौन उसको वो घड़ी क्या चीज़ है?
-ऋतुबाला रस्तोगी, चाँदपुर, बिजनौर, उत्तर प्रदेश



