मनोरंजन
ग़ज़ल – रीता गुलाटी

कान्हा से रात दिन खुशी को माँगते रहे,
डूबे हैं साँवरे में सभी नाचते रहे।
करवट बदल-बदल के कमी सोचते रहे,
क्या हो गयी कमी वही सब आँकते रहे।
ऐ जिंदगी सताती रही आज तू हमे,
बस यूं ही जिंदगी से सबक सीखते रहे।
माना मिला है दर्द बताया नही कभी,
खुशियों का दर खुले वो दर माँगते रहे।
बातें दिलो की यार नही हम बता सके,
सहते रहे थे गम खुशियाँ बाँटते रहे।
सुनते कथा भी राम की मंदिर मे आज तो,
चौपाईयाँ सुनी जो वही बाँचते रहे।
रूठे हुऐ वो दम्पति, बोले नही अभी,
माता पिता ही आज उन्हे जोड़ते रहे।
– रीता गुलाटी..ऋतंभरा, चण्डीगढ़




