मनोरंजन
ग़ज़ल – रीता गुलाटी

आज करती दुआ खैर,संसार की।
माँगती मैं दुआ आज भरतार की।
बात कैसे करे आज इंकार की।
क्या वजह तू बता आज स्वीकार की।
जो घटा आज संसद, मे देखे सभी।
सुर्खियां आज होगी अखबार की।
यार मेरा मुझे खूबसूरत लगा।
जिंदगी अब लगे यार गुलजार की।
प्यार तेरा हमे बस सताने लगा।
सोचते रात दिन बात बेकार की।
टूटते फिर रहे आज परिवार क्यों?
बात होती बड़ी यार तकरार की।
चुप का तमगा लिये आज वो है खड़ा।
लोग बातें करे आज हथियार की।
यार उल्फत भी देती मजा जिंदगी।
ले मज़ा यार अब भूल मनुहार की।
रात दिन सरहदों पे वो बैठे हुऐ।
जान ले लेगे फौजी वो गद्दार की।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़




