मनोरंजन
ग़ज़ल – रीता गुलाटी

ये जिंदगी भी हमें सताए्ं।
कुसूर क्या जो ये दिन दिखाएं।
सुनो बता दो खता हमारी।
चलो भुला दे पुरानी बातें।
हमें बुलाती कहे खुशी से।
नई है मंजिल नई है राहें।
बुला लो उसको सनम है मेरा।
भुला दे ग़फ़लत चलो निभाएं।
करेगे बातें भी कायदे से।
चलो दे मिलकर सभी दुआएं।
मिली है जब से तेरी निगाहें।
तुम्हे ही सोचें तुम्हे ही पाएं।
छुपा रही वो मैं भेद कितने।
मिलो हमे गर वो सब बताएं।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़




