मनोरंजन
ग़ज़ल – विनोद निराश

कभी हमसे मुलाकात किजिए,
फुर्सत मिले तो बात किजिए।
मुद्दत से है मुन्तज़िर तेरे ही,
हमारे पहलू में रात किजिए।
गर है दिल में कोई उलझन,
तो जाहिर जज्बात किजिए।
अगरचे न मुक़ाबिल फिर भी
बयां अपने हालात किजिए।
है दिल में जो भी कह डालो,
सरेआम वो ख्यालात किजिए।
है बड़ा बेगैरत निराश फिर भी,
कुछ तो इन्तेज़ामात किजिए।
– विनोद निराश, देहरादून
मुद्दत – लम्बा समय / अरसा
मुन्तज़िर – प्रतीक्षारत / इंतज़ार में
अगरचे – यद्यपि / हालाँकि / बावजूद
मुक़ाबिल – तुलनात्मक / प्रतिद्वंद्वी / प्रतियोगी / बराबरी के
बेगैरत – बेशर्म / निर्लज्ज / सम्मानहीन / स्वाभिमानहीन
इन्तेज़ामात – व्यवस्था / बंदोबस्त / प्रबंध / आयोजन




