मनोरंजन

गीतिका — मधु शुक्ला

 

जब कभी गाँव छूट जाता है,

व्यक्ति धन और गम कमाता है।

 

मित्र परिवार से विलग होकर‌ ,

उर मधुर बोल सुन न पाता है।

 

द्वेष,छल,घात जब सताते हैं,

प्रेम, सहयोग याद आता है।

 

भोज्य,जल, वायु,स्वास्थ्य जब लूटे,

घर तभी गाँव का लुभाता है।

 

ज्ञान, विज्ञान जो गहें उनको  ,

गाँव ‘मधु’ पथ प्रगति दिखाता है।

— मधु शुक्ला, सतना , मध्यप्रदेश

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