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गीत – जसवीर सिंह हलधर

आत्म रक्षण के लिए अब, मत किसी से याचना कर ।

हार का भय त्याग दे यह , आत्मजय की कामना कर ।।

 

भीड़ है कुछ सिर फिरों की, आ रही है ओर तेरे ।

भारती पर तंज़ कसती, केतु पर आंखें तरेरे ।

बांध ले सर पर कफ़न अब, मोड़ दे रुख आंधियों का ,

हो समय प्रतिकूल बेशक, काल का भी सामना कर ।

आत्म रक्षण के लिए अब, मत किसी की याचना कर ।।1

 

देख ले दुश्मन पड़ोसी , के उड़े संकल्प सारे ।

भीख का लेकर कटोरा, फिर रहा है चीन द्वारे ।

भारती के कर्णधारों पर, हमें पूरा भा रोसा ,

देश का गौरव बचाने, के लिए आराधना कर ।

आत्म रक्षण के लिए अब, मत किसी से याचना कर ।।2

 

आग की लपटें उठें  तब, कौन किसका साथ देता ।

बाढ़ में डूबे हुए को, कौन अपना हाथ देता ।

चीर कर धारा नदी की ,लिख नई गाथा सदी की ,

हाथ में लेकर तिरंगा, भारती की साधना कर ।

आत्म रक्षण के लिए अब, मत किसी से याचना कर ।।3

 

घोर संकट के समय में, आत्म बल ने ही बचाया ।

धैर्य जो धारण किया था, वो हमेशा काम आया ।

संत ऋषियों की धरा ये, शांति का पैगाम देती ,

शक्ति बाजू में रहे “हलधर” यही तू प्रार्थना कर ।

आत्म रक्षण के लिए अब, मत किसी से याचना कर ।।4

-जसवीर सिंह हलधर, देहरादून

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