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गीत – जसवीर सिंह हलधर

 

सुहाना प्यार का मौसम कभी तो ख़्वाब में आओ ।

तुम्हारी याद है पुरनम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।

 

तुम्हारे  पास  में  गिरवी  पड़ी  हैं  चांदनी  रातें ।

अभी भी शेष हैं कुछ यार से मनुहार बातें ।

चलो मैं को बनाएं हम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।1

 

सँजो कर आज तक मैंने रखे किस्से जवानी के ।

अभी पन्ने बचे हैं शेष अपनी इस कहानी के ।

बुढापा हो बरहम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।2

 

तुम्हारे गेसुओं की बू मुझे अब भी सताती है ।

तुम्हें छूकर हवा की पालकी संदेश लाती है ।

कलेजे में बजे सरगम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।3

 

मेरा तो दम निकलता  है  तुम्हारे  रुठ जाने से ।

रखें क्या वास्ता “हलधर” फरेवी इस जमाने से ।

बसे तुम स्वास में हमदम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।

तुम्हारी याद है पुरनम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।4

– जसवीर सिंह हलधर, देहरादून

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