
सुहाना प्यार का मौसम कभी तो ख़्वाब में आओ ।
तुम्हारी याद है पुरनम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।
तुम्हारे पास में गिरवी पड़ी हैं चांदनी रातें ।
अभी भी शेष हैं कुछ यार से मनुहार बातें ।
चलो मैं को बनाएं हम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।1
सँजो कर आज तक मैंने रखे किस्से जवानी के ।
अभी पन्ने बचे हैं शेष अपनी इस कहानी के ।
बुढापा हो बरहम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।2
तुम्हारे गेसुओं की बू मुझे अब भी सताती है ।
तुम्हें छूकर हवा की पालकी संदेश लाती है ।
कलेजे में बजे सरगम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।3
मेरा तो दम निकलता है तुम्हारे रुठ जाने से ।
रखें क्या वास्ता “हलधर” फरेवी इस जमाने से ।
बसे तुम स्वास में हमदम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।
तुम्हारी याद है पुरनम कभी तो ख़्वाब में आओ ।।4
– जसवीर सिंह हलधर, देहरादून




