उत्तराखण्ड

जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक संस्था के तत्वावधान में ऑनलाइन काव्य संध्या का हुआ आयोजन

utkarshexpress.com देहरादून – ‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था के तत्वावधान में दिनांक 20 नवंबर 2025 (बृहस्पतिवार) को एक भव्य एवं भावपूर्ण ऑनलाइन काव्य संध्या का आयोजन गूगल मीट के माध्यम से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था की संयोजक श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’ ने अपनी मधुर वाणी में माँ शारदा की वंदना प्रस्तुत कर वातावरण को श्रद्धा, सौंदर्य और पवित्रता से भर दिया।
कार्यक्रम का कुशल संचालन संस्था की महामंत्री डॉ. भारती मिश्रा ने अत्यंत विधिवत, गरिमापूर्ण एवं सौम्य ढंग से किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्याम तिरुआ (ज्वाइंट कमिश्नर राज्य जी.एस. टी., काशीपुर) रहे।
आपकी संवेदनशील दृष्टि, सक्रिय सामाजिक भूमिका और साहित्यिक अभिरुचि ने समूचे उत्तराखंड में आपको सम्मानित पहचान प्रदान की है। मंचासीन अतिथियों में संस्था की अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। विशिष्ठ अतिथियों में अमित शुक्ला (मशहूर शायर एवं कवि, बरेली), विजय कुमार द्रोणी (संगठन मंत्री), श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’ (संयोजक) की गरिमामय उपस्थिति रही।
काव्य संध्या में अनेक सुप्रसिद्ध कवि एवं रचनाकारों ने अपनी सृजनशील रचनाओं से श्रोताओं को भाव-विभोर किया। उपस्थित रचनाकारों में श्याम तिरुआ , अमित शुक्ला , कुमार विजय द्रोणी, श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’, श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’, डॉ. भारती मिश्रा, श्रीमती सिद्धि डोभाल, श्रीमती संगीता वर्मानी ‘साध्या’, श्रीमती निकी पुष्कर, श्रीमती स्वाति ‘मौलश्री’, श्रीमती नीरू गुप्ता ‘मोहिनी’, श्रीमती शोभा पराशर, श्रीमती रेखा जोशी तथा श्रीमती भव्यता कुश के सुन्दर काव्य-पाठ से मंच गौरवान्वित हुआ। आज की सुंदर प्रस्तुतियाँ –
• श्याम तिरुआ ने “दिल पर घाव कुछ गहरा लगा” ग़ज़ल प्रस्तुत कर माहौल को सरस और भावपूर्ण बना दिया।
• अमित शुक्ला ने “वक़्त से जो लम्हा चुराकर दे दे कोई आज लाकर” ग़ज़ल सुनाकर खूब तालियाँ बटोरीं।
• श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’ जी ने “दिल के टाँके खोल सभी हम अंदर तक का दिखलाते…” सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।
• श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ ने “बादल गरजा, टूटा पर्वत” जैसी प्रभावशाली पंक्तियों से वाहवाही लूटी।
• कुमार विजय द्रोणी ने और “तन का रोना सब सुनते हैं…” की प्रस्तुति पर श्रोताओं ने खूब तालियाँ बजाईं।
• डॉ. भारती मिश्रा की रचना “मैं समय की बेटी हूं, संघर्ष मेरा श्रृंगार है” ने समस्त दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
• श्रीमती संगीता वर्मानी ‘साध्या’ जी ने “ज़िंदगी की दौड़ में हम बहुत आगे निकल आए” सुनाकर प्रभावित किया।
• श्रीमती रेखा जोशी ने “दीप की लौ जलती रही रात भर…” सुनाकर वाहवाही लूटी।
• निकी पुष्कर जी की प्रस्तुति “कहीं भी कोई मुझे उस एक शख़्स-सा न लगे…” मंत्रमुग्ध कर देने वाली रही।
• नीरू गुप्ता ‘मोहिनी’ की पंक्तियाँ “धूप की थाली में बचपन रखा था…” श्रोताओं के मन में उतर गईं।
• स्वाति ‘मौलश्री’ ने “उधार-सा मिला मुझे यह सुकून किसका है” सुनाकर तालियाँ बटोरीं।
. भव्यता कुश ने “जीवन चलता जाएगा…” सुनाकर जीवन-दर्शन का सुंदर चित्र खींचा।
काव्य संध्या में हास्य, व्यंग्य, ओज, श्रृंगार और करुण सभी रसों की धारा बहती रही।
6 अतिथियों के उद्बोधन से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह हुआ। मुख्य अतिथि श्याम तिरुआ और विशिष्ठ अतिथि अमित शुक्ला ने अपने उद्बोधन में संस्था के साहित्यिक कार्यों की सराहना करते हुए सभी रचनाकारों की साधना को नमन किया। उन्होंने कहा कि “आज ‘जीवन्ती’ देवभूमि साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था की काव्य संध्या में मुख्य अतिथि के रूप में आना मेरे लिए सौभाग्य का विषय है।”
संस्थापिका एवं अध्यक्ष श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ ने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि “सभी साहित्यकार इस पुण्यमय धारा को निरंतर बहाते रहें, जहाँ शब्द संस्कार बनें, विचार शक्ति बनें और साहित्य समाज का पथ–प्रदीप बने।” उन्होंने सभी का हृदयपूर्वक धन्यवाद किया और प्रेरक आशीर्वचन के साथ गोष्ठी को पूर्णता प्रदान की।
कार्यक्रम के अंत में महामंत्री डॉ. भारती मिश्रा ने सभी अतिथियों, कवियों और सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। यह काव्य संध्या एक उत्कृष्ट सृजनात्मक गोष्ठी सिद्ध हुई। साहित्यिक संवाद, सौहार्द और रचनात्मक ऊर्जा का एक सुंदर एवं जीवंत उत्सव।
– श्रीमती कविता बिष्ट ‘नेह’ (अध्यक्ष), डॉ. भारती मिश्रा (महामंत्री), श्रीमती मणि अग्रवाल ‘मणिका’ (संयोजक)

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