तिरंगा भारत का – श्याम कुंवर भारती

जब गाड़ी विकाश की हमारे भारत की तेज दौड़ने लगी ।
क्यों आंख दुश्मनों की देख प्रगति भारत की गड़ने लगी ।
जंजीर गुलामी काट कब की जश्न-ए-आजादी मनाते हैं ।
पहचान है दुनिया में हमारी हर तरफ है खूब बढ़ने लगी ।
ऐसा नहीं कोई चाल चलता नहीं हमे गड्ढे में धकेलता नहीं ।
होते नहीं मगर हम टस से मस छाती वैरियों जलने लगी ।
जल जमी आकाश में गाड़ दिए हमने झंडे कामयाबी के ।
देख हमारी खुशहाली क्यों आंख गद्दारों की फटने लगी ।
पिटा रोया था पाक तब भारत ने सीज फायर ऐलान किया।
श्रेय ले ट्रंप ने सबको हैरान किया लोगों बोली चलने लगी।
बढ़ाकर टैरिफ ट्रंप चाहता है भारत को नाचना इशारे पर।
भारत है पाक नहीं तलवा चाटे फर्क नहीं कोई पड़ने लगी।
एक युग था जब खरीदे जाते थे हथियार सभी विदेशों से।
युग बदला बम बारूद मिसाइल बिक्री विदेशों फैलने लगी।
है भारती हम हर नीति में माहिर हमारी कोई शान नहीं कही।
विदेश नीति कूटनीति सामरिक शौर्य सेना की धधकने लगी।
लहराएगा तिरंगा भारत दुनिया में सबसे ऊंचा देख लेना।
बुलंद होगा नारा जय हिंद आसमां की बुलंदी गूंजने लगी।
– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड




