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दशम पातशाह की वाणी – रोहित आनंद

नीले गगन-सा तेज लिए,
केसरिया साहस साथ लिए,
धर्म-दीप जलाने आए,
गुरु गोबिंद सिंह अवतार लिए।

शब्द बने शस्त्र सत्य के,
करुणा बनी पहचान यहाँ,
अन्याय से टकराने को,
खड़ा रहा इंसान यहाँ।

खालसा पंथ की ज्योति जली,
भय के अंधेरे दूर हुए,
मानवता को सिंह बनाया,
दास नहीं, सब सूर हुए।

कलम, कृपाण और कर्म साथ,
जीवन का संदेश दिया,
निडर रहो, निष्कलंक रहो—
युग को अमर उपदेश दिया।

नमन तुम्हें, हे वीर गुरु,
इतिहास तुम्हें प्रणाम करे,
हर जन्म-जयंती पर भारत,
तेरा उजला नाम धरे।

(5 जनवरी को, गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पर)

-रोहित आनंद,  बांका, बिहार डी. मेहरपुर

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