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दिल का दीया – सविता सिंह

ये दीये तो जल के फिर बुझ जायेंगे,
कुछ पल की रोशनी बन छिप जायेंगे,
एक दीप है अंतस किसी कोने में,
प्रेम की लौ से सदा जगमगायेंगे।
बस इतनी सी बात कहते जायेंगे,
तुझसे ही जुड़ के हम सँवर जायेंगे,
चाहे मिल न पाएं इस जीवन में,
हम दिल का दीया सदा ही जलायेंगे।
– सविता सिंह मीरा, जमशेदपुर




