मनोरंजन
दीपावली – रीता गुलाटी

आ गयी दीपावली घर उजाला हो गया।
दीप घर घर में जले हैं घर ये उजला हो गया।
क्या कहा था यार मैने तू खफा सा हो गया।
बात छोटी सी ही थी लेकिन फसाना हो गया।
एक तू ही तो है मेरे आज जीने की वजह।
फिर हुआ क्या आज ऐसा जो मनाना हो गया
बिन तुम्हारे जी न पाऊँ अब लगे सब खार है।
पल उदासी के मिले तेरा सताना हो गया।
तोड़ डाली हादसों ने हाय अब मेरी कमर।
पैर टूटा चल न पाऊँ बस रुलाना हो गया।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़




