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देश भक्ति – श्याम कुंवर भारती

 

न शोहरत न दौलत मुझे अपना वतन चाहिए।

फलता फूलता हुआ और खिलता चमन चाहिए।

 

ना हो दुश्मन कोई ना ना हो अड़चन कोई।

मर सकूं मैं वतन सिर तिरंगा कफन चाहिए।

 

खून शहीदों से सींचकर हरा किया गुलशन।

शाहिद होने ना दे फौलादी ऐसा बदन चाहिए।

 

अपनी धरती की मिट्टी माथे लगायेंगे हम।

हरी धरती में बहती गंगा बांकपन चाहिए।

 

ना हिंदू कोई ना मुस्लिम कोई सभी बन के भाई रहे।

देश तेरा ना मेरा सबका ऐसा मन चाहिए।

– श्याम कुंवर भारती, बोकारो, झारखंड

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