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नहीं और कुछ हम चाहते हैं तुमसे – गुरुदीन वर्मा

 

नहीं और कुछ हम चाहते नहीं तुमसे, हमको हमारी तुम खुशियां वह दे दो।

चाहे करो नहीं तुम प्यार हमसे, मगर तुम हमारी बगियाँ वह दे दो।

नहीं और कुछ हम चाहते हैं तुमसे—————–।।

 

जैसा कि हमने सोचा था अब तक, तुम्हारे लिए तुमको अपना बनाकर।

ख्वाबों में तुमको हमने सजाकर, जीवन के लिए तुमको अपनाकर।।

मगर तुम उतने वफ़ा नहीं हमसे, हमें तुम हमारा प्यार वह दे दो।

चाहे करो नहीं तुम प्यार हमसे, मगर तुम हमारी बगियाँ वह दे दो।

नहीं और कुछ हम चाहते हैं तुमसे—————।।

 

हमने तो अपना खून बहाकर, तस्वीर तुम्हारी ऐसी बनाई थी।

हमने तो कितने अरमान लेकर, महफ़िल तुम्हारी हमने सजाई थी।।

मगर तुमने बदनाम हमें कर दिया, हमें तुम हमारा जीवन वह दे दो।

चाहे करो नहीं तुम प्यार हमसे, मगर तुम हमारी बगियाँ वह दे दो।

नहीं और कुछ हम चाहते हैं तुमसे—————–।।

 

तुमने हमसे की बेवफ़ाई, यहाँ और से तुमने मोहब्बत करके।

तुमने सजाया उसके दिल को, दिल यह हमारा बर्बाद करके।।

तुम बेशर्म और बेरहम निकले, हमें तुम हमारी इज्जत वह दे दो।

चाहे करो नहीं तुम प्यार हमसे, मगर तुम हमारी बगियाँ वह दे दो।

नहीं और कुछ हम चाहते हैं तुमसे—————–।।

 

मगर याद रखना तुम यह कल को, जी नहीं पावोगे हमारे बिना तुम।

आयेगी याद हमारी मोहब्बत, करोगे हमारी वफ़ा यह याद तुम।।

नहीं अब हमको कुछ मतलब तुमसे, हमें तुम हमारी बहार वह दे दो।

चाहे करो नहीं तुम प्यार हमसे, मगर तुम हमारी बगियाँ वह दे दो।

नहीं और कुछ हम चाहते हैं तुमसे—————-।।

गुरुदीन वर्मा (आज़ाद), तहसील एवं जिला- बारां (राजस्थान)

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