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पढ़े ला जाबो ना – अशोक यादव

चलव-चलव संगवारी, पढ़े ला जाबो ना।
अपन जिनगी ला अब गढ़े ला जाबो ना।।
खुलगे जम्मों स्कूल, हो जा तंय तियार।
धरले तंय हा बस्ता, गियान के उजियार।।
सिकसा के सीढ़िया मा चढ़े ला जाबो ना।
चलव-चलव संगवारी, पढ़े ला जाबो ना।।
नवा किरन के संग मा, नवा होही अंजोर।
पढ़ईया लईका मन ले, चमकही गली-खोर।।
लक्ष्य अउ मंजिल कोती बढ़े ला जाबो ना।
चलव-चलव संगवारी, पढ़े ला जाबो ना।।
मोरो सपना पूरा होही, तोरो सपना पूरा होही।
काबिल बनबो, हमरो बर कुछु अच्छा होही।।
अगियान अंधियारी ला मेटे ला जाबो ना।
चलव-चलव संगवारी, पढ़े ला जाबो ना।।
स्कूल सिकसा के मंदिर, गुरुजी रद्दा देखाही।
गुरु गियान के भंडार, बिदया के शंख बजाही।।
गियान, भकती के कंठी जपे ला जाबो ना।
चलव-चलव संगवारी, पढ़े ला जाबो ना।।
– अशोक कुमार यादव, मुंगेली छत्तीसगढ़




