पावन धर्मनगरी हरिद्वार में विद्या वाचस्पति डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ आचार्य विनोबा भावे स्मृति सम्मान-2026 से विभूषित
रैनी गांव के वरिष्ठ साहित्यकार की विद्वत्ता एवं साहित्य-साधना को राष्ट्रीय मंच पर मिला सम्मान, मुजफ्फरपुर की धरती हुई गौरवान्वित।

utkarshexpress.com मुजफ्फरपुर, बिहार। माँ गंगा की पावन धारा, देवभूमि की आध्यात्मिक चेतना और भारतीय ऋषि-परंपरा की दिव्य आभा से आलोकित धर्मनगरी हरिद्वार में मुजफ्फरपुर जिले के रैनी गांव निवासी प्रख्यात विद्वान एवं वरिष्ठ साहित्यकार विद्या वाचस्पति डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ को आचार्य विनोबा भावे स्मृति सम्मान-2026 से विभूषित किया गया। यह सम्मान 25 अक्टूबर 2026 को हरिद्वार में आयोजित अंतरराष्ट्रीय आचार्यकुल केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन सह कवि सम्मेलन के गरिमामय अवसर पर प्रदान किया गया। आचार-विचार की पवित्रता, साहित्य-साधना की निष्ठा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पण की भावना से ओतप्रोत इस भव्य आयोजन का संपादन आचार्यकुल एवं थावे विद्यापीठ के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस अवसर पर साहित्य, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना से जुड़े अनेक विद्वानों एवं प्रबुद्धजनों की उपस्थिति ने समारोह की गरिमा को और अधिक ऊँचाई प्रदान की।
डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ को यह प्रतिष्ठित सम्मान वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आचार्य डॉ. धर्मेंद्र, अंतरराष्ट्रीय सनातन धर्म एवं शंकराचार्य परिषद के वेदमूर्ति डॉ. विद्यासागर उपाध्याय, ‘ग्राम टुडे’ के संपादक डॉ. शिवेश्वरदत्त पांडेय तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. विनोद कुमार वर्मा जैसी विद्वत विभूतियों के कर-कमलों से प्राप्त हुआ। यह सम्मान उनकी दीर्घकालीन साहित्य-साधना, ज्ञाननिष्ठा और वैचारिक समृद्धि के प्रति समाज की श्रद्धा का प्रतीक है। भावभूमि पर डॉ. पाठक ‘प्रसून’ की यह उपलब्धि साहित्यिक जगत के लिए हर्ष, गौरव और प्रेरणा का विषय है।
सम्मान प्राप्ति के उपरांत डॉ. विजय कुमार पाठक ‘प्रसून’ ने इसे अपने जीवन का अत्यंत गौरवशाली क्षण बताया। उनकी यह उपलब्धि नई पीढ़ी के साहित्य-साधकों को निरंतर अध्ययन, सृजन, विनम्रता और समाज के प्रति सकारात्मक योगदान की प्रेरणा प्रदान करती है। मुजफ्फरपुर जिले के नवोदित साहित्यकार कुमार संदीप ने कहा कि रैनी गांव की माटी से निकलकर हरिद्वार की पावन धरा पर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होना इस बात का सुंदर प्रमाण है कि प्रतिभा जब साधना, संस्कार और समर्पण के साथ आगे बढ़ती है, तब उसकी सुगंध स्थानीय सीमाओं को पार कर दूर-दूर तक फैलती है। रिपोर्ट -कुमार संदीप (मुजफ्फरपुर -बिहार)




