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पिता – राजेश कुमार झा

 

पिता बच्चों के लिए एक बाग के माली की तरह है,

जिस तरह एक माली अपने बगीचे की देखभाल करता है ,

उनको मिट्टी खाद पानी देकर उनकी देखभाल करता है,

पौधे से उनको पेड़ब नाता है,

इसी तरह एक पिता भी अपने बच्चों को ,

प्यार दुलार संस्कार और डाट फटकार से,

बच्चों की भविष्य का निर्माण करता है,

एक पिता अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए,

दिन-रात धूप छांव भूख प्यास कभी नहीं देखता,

वह निरंतर लगा रहता है,

कि मेरे बच्चे मुझसे भी आगे बड़े मेरा नाम रोशन करें,

एक नए भविष्य एक नए युग का आरंभ करें

पिता बच्चों  के लिए उस उगते हुए सूरज की तरह है,

जैसे जैसे दिन  निकलने के साथ हम अपने कार्यों की शुरुआत करते हैं,

वह पिता ही है जो लोगों के ताने प्रताड़ना उच्च नीच सब सहकार,

अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य की निर्माण की कामना करता है,

पिता पर लिखने के लिए तो बहुत कुछ है,

मैं एक छोटा सा व्यक्ति पिता का गुणगान क्या करूंगा,

क्योंकि पिता उसे गगन उसे आसमान की तरह है,

जिसका छोर पाना असंभव है,

बच्चे पिता के प्रेम को कभी नहीं समझ सकते,

क्योंकि पिता बच्चन के लिए ऊपर से जितना कठोर होता है,

अंदर से उतना ही वह प्रेम से भरा होता है,

पर यह बात वह कभी बच्चों को जाहिर नहीं करता है,

पिता का प्रेम बच्चों को जब समझ में आएगा जब बच्चे खुद पिता बनेंगे

क्योंकि पिता सिर्फ पिता होता है।

– राजेश कुमार झा,बीना, मध्य प्रदेश

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