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प्रभु का कृपा ये ज़िन्दगी – कालिका प्रसाद

ज़िन्दगी के बारे में क्या बताऊं,
चार दिन की है ये प्यारी ज़िन्दगी।
कभी फूलों की सी सुगंध सी ये ज़िन्दगी,
कभी कांटों से घिरीं सी लगती ज़िन्दगी।
कभी हरियाली सी है ये ज़िन्दगी,
कभी बंजर सी सूखी है ये ज़िन्दगी।
कभी सूरज की किरण सी है जिन्दगी,
कभी अमावस्या की रात सी है ज़िन्दगी।
कभी यथार्थ से भी घबराती ज़िन्दगी,
कभी कल्पनाओं में खो जाती ज़िन्दगी।
कभी खुशियों से भरपूर होती ज़िन्दगी,
कभी कष्टों के छाया में गुजरती ज़िन्दगी।
कभी मंजिल के करीब रहती ज़िन्दगी,
कभी असफलता की चादर ओढ़े हैं ज़िन्दगी।
कभी बसन्त सी रंगीन लगती ज़िन्दगी,
कभी बेबस ,लाचार लगती ये ज़िन्दगी।
क्या कहूं कैसे कहूं जैसे, भी है ज़िन्दगी,
प्रभु का कृपा प्रसाद है ये ज़िन्दगी।
– कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार
रुद्रप्रयाग उत्तराखंड




