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प्रेम के सागर पिया – कविता बिष्ट ‘नेह

तुम प्रेम के सागर पिया,
मैं उर बसी मधुमास हूँ।
बदरा बने तुम व्योम के,
भागीरथी मैं खास हूँ।।
तुम शिव जटा का सार हो,
मैं मृदुल रस की धार हूँ।
सुरभित सजा अभिनीत हो,
मैं प्रेरणा का गीत हूँ।।
– कविता बिष्ट ‘नेह,
देहरादून, उत्तराखंड




