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मनमोहन मैं बलिहारी – अनिरुद्ध कुमार

वह भाद्र माह का कृष्ण पक्ष,
जब जन्म लिये लीला धारी।
वसुदेव देवकी काँप उठे,
अब आठवें पुत्र की बारी।।
जब कंस सुनेगा संदेशा,
झट आयेगा अत्याचारी।
यह भाद्रपक्ष विकराल लगे,
अब रक्षा करना बनवारी।।
व्याकुलता का ना ओर छोर,
वह कालकोठरी मजबूरी।
सूझे ना कोई जतन नया,
कैसे टारे वो लाचारी।।
कैसी लीला पट आप खुले,
घनघोर घटा आफत भारी।
नवजात लिए वसुदेव चले,
कर गोकुल नगरी तैयारी।।
यमुना में तेज उफान उठे,
कैसी कैसी लीला सारी।
पग रखते जल में राह बना,
गोकुल पहुँचें तब त्रिपुरारी।
यशोदा नन्द घर पले बढ़े,
ममता इस लीला से हारी।
है आज जन्म दिन छलिया का,
हे मनमोहन मैं बलिहारी।।
– अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड




