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माता दुर्गा – कविता बिष्ट नेह

माँ दुर्गा की वंदना, कर लो आठों याम।
करो सुखों की कामना, सुखमय माँ का धाम।।

भक्ति-भाव से ही मिले, दुर्गा माँ का प्यार।
जन्म-जन्म का पुण्य है, देवी के दरबार।।

माता के दरबार में, मिलता सुख आनंद।
दर्शन दो माँ शैलजा, पावन हो हर छंद।।

ममतामय गागर भरी, दे दो आशीर्वाद।
दुर्गा श्री मन आपका, बजे शंख अरु नाद ।।

माता के नौ रूप हैं, जगमग करता द्वार।
भक्तों की अरदास ही, भजनों का है सार।।

घट-घट माँ का वास है, अटल भक्ति विश्वास।
पुष्प पत्र फल आरती , मातु करो तम नाश।।

शक्ति रूप माँ पार्वती, कर दो जग उद्धार।
दुख हर लो संसार के, दो सुख सदा अपार।।

विनती वीणापाणि माँ,कर दुःखों का नाश।
सकल मनोरथ पूर्ण हों, शुचि चरणों में वास।।

अर्चन करते शारदा, होता बुद्धि विकास।
नव्य भाव उर में भरे, घर-घर करे निवास।।

-कविता बिष्ट ‘नेह’, जीएमएस रॉड , देहरादून,  उत्तराखंड
(अध्यक्ष, संस्थापक)
जीवन्ती देवभूमि साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक राष्ट्रीय संस्था देहरादून उत्तराखंड

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