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मियां बीबी राजी तो भाड़ में जाए दाजी (व्यंग्य) – मुकेश कबीर

utkarshexpress.com – आज एक जबरजस्त न्यूज देखी जिसमें कहा गया है कि 53 प्रतिशत हिंदुस्तानी लोग एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर में हैं। हिंदी भाषा में इसका मतलब है कि शादी होने के बाद भी किसी और के साथ गठबंधन और शुद्ध देसी भाषा में कहें तो “पति पत्नी और वो”। और आगे खबर यह भी है कि इस प्रेम यज्ञ में तमिलनाडु देश में नंबर वन है, मतलब देश के नक्शे के हिसाब से शुरुआत नीचे से हुई है ,दिल्ली दूसरे नंबर पर है मतलब वहां दो नंबर के काम वाले ज्यादा हैं और मुंबई फिसलकर तीसरे नंबर पर आ गया मतलब बड़ा पाव अब घटा पाव हो गया। खैर हमें इससे क्या हम तो कुंवारे हैं,यह खबर तो शादीशुदा लोगों की है। कुंवारे मतलब जो दुकान में डेरीमिल्क लेने जाते हैं और शादी शुदा मतलब जो डेली मिल्क लेने जाते हैं। यह जो डेरी मिल्क से डेली मिल्क तक का सफर है न ये भी एक बड़ा लोचा है जिंदगी का। क्योंकि जिसके लिए डेयरीमिल्क लाई जाती है वो किसी कारण से मिल नहीं पाए तो कहीं और ट्राय अगेन वाली पोयम गाई जाती है फिर शुरू हो जाता है डेली मिल्क लाने का सिलसिला। और सिलसिला मतलब रंग बरसे मतलब बलम तरसे लेकिन कहीं कहीं गोरी भी तरसती है। अब मामला बराबरी का है एकदम सेक्युलर। वैसे भी देश में सब समान हैं इसलिए सबको इसमें योगदान देना चाहिए तभी समान नागरिक संहिता लागू हो सकेगी। अभी सिर्फ तिरपन परसेंट लोग हैं ,सैंतालीस परसेंट का रवैया अभी भी सहयोगात्मक नहीं है इसलिए इस मामले में भी भारत पीछे है,अमेरिका अभी भी नंबर वन है। इस मामले में अमेरिका को नंबर वन होना भी चाहिए क्योंकि वहां वाले भूरा भाई मेलजोल के पक्षधर हैं,उनको खुद भी दो के बीच में घुसने का शौक है, इसलिए उनके नागरिक भी दो के बीच में तीसरा बनें तो क्या दिक्कत है? और जिनको दिक्कत होती है वो नंबर वन कभी बन भी नहीं पाते किसी भी मामले में। अब हमारे यहां मामला थोड़ा अलग है , हमारे यहां पति पत्नी के बीच में तीसरे को अच्छा नहीं माना जाता इस कारण कभी कभी तो तीसरे का तीसरा भी हो जाता है। हम अहिंसावादी होते हुए भी इस मामले में हिंसावादी हैं,कोई रियायत नहीं है ।
एक दिन अखंड कुंवारे बेधड़क भोपाली जी बोल रहे थे “अरे खां बड़ा बड़ा टंटा है आजकल ,मेरे घर में चोरी होती है तो सारे पड़ोसी चुप रेते हैं लेकिन मेरे घर में कोई छोरी हो तो पूरे मुहल्ले का खून खौल उठता है फिर आ जाते हैंगे लट्ठ लेके” ।
मुझे लगता है इसी दोगलेपन के कारण हम नंबर वन नहीं बन सके , जब हम हर मामले में गांधीबापू की दुहाई देते हैं तो इस मामले में उनकी लाठी तक क्यों पहुंच जाते हैं? बापू तो कहते थे कोई एक गाल पर मारे तो दूसरा आगे कर दो इसका मतलब जब कोई एक लड़की से प्रेम करे तो उसको दूसरी भी लाकर दे दो, लेकिन हमारे सिस्टम ही अलग हैं जहां लाठी चलाना चाहिए वहां बापू रोक लेते है और जहां बापू से काम चलाना हो वहां लाठी चला देते हैं। लेकिन फिर भी लाठी हमारे प्रेमयज्ञ को रोक कहां पाती है। खैर,यह सिलसिला तो चलता रहेगा क्योंकि यह दुनिया ही चलाचली का मेला है इसलिए चलते रहो चलाते रहो चरैवेति चरैवेति…जब तक है जान,लूट लो पाकिस्तान। अब आप भी इस मिशन में शरीक होइए कब तब दूसरों से ही करवाएंगे ? आखिर देश को नंबर वन बनाने के लिए हम कुछ प्रयास नहीं कर सकते क्या ? और वैसे इस पराक्रम में कठिनाई भी क्या है,आप भी इसको आसानी से कर सकते हैं क्योंकि यह काम ऐसा है जिसके लिए आपको कोई ऑफिस खोलने की जरूरत नहीं है और न ही बैंक से लोन लेने की और न ही भारत सरकार की स्टार्ट अप योजना की जरूरत है,आप इसे कभी भी कहीं भी शुरू कर सकते हैं,स्कूल कॉलेज में करें ,स्टूडेंट नहीं तो फैकल्टी करे और कोई ऑफिस नहीं हैं तो वर्क फ्रॉम होम करें । किसी से डरने की जरूरत भी नहीं है क्योंकि अंग्रेजी में कहावत है ” मियां बीबी राजी तो भाड़ में जाए दाजी”। वैसे भी आपको तो तीसरा बनना है,तीसरे से डरना नहीं है। यह काम आपसी सहमति का है,बस म्युचल अंडरस्टेंडिंग जरूरी है इसलिए म्युचल अंडरस्टेंडिंग डेवलप कीजिए बस, लेकिन लाल बुझक्कड़ चच्चा की एक बात जरूर ध्यान रखियो भैया “म्युचल फंड इन्वेस्टमेंट इज द सब्जेक्ट ऑफ मार्केट रिस्क” अर्थात बाबूजी जरा धीरे चलना… ( लेखक कवि एवं व्यंग्यकार हैं।) (विनायक फीचर्स)

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