मुझको जरूरत तेरी कुछ नहीं – गुरुदीन वर्मा

क्या नहीं मेरे पास जो मांगू तुमसे, मुझको जरूरत तेरी कुछ नहीं।
कुछ कमी नहीं मुझमें, सबमें काबिल हूँ, तेरे लिए फुरसत कुछ नहीं।।
क्या नहीं मेरे पास जो मांगू————-।।
कुछ किसी से मैंने मांगा नहीं, मैंने ही यह बनाया है महल।
लहू-पसीना मेरा ही बहा है, यह है मेरी ही मेहनत का फल।।
अपने दम पे जिन्दा हूँ , नहीं सहारा किसी का, इसमें रहमत तेरी कुछ नहीं।
क्या नहीं मेरे पास जो मांगू ——————।।
तरजीह जो देता है जीवन में, सिर्फ अपने ही मतलब को।
जो सिर्फ भूखा है धन का, जो भूल गया है मोहब्बत को।।
नहीं मतलब उससे मुझको,नहीं वह दोस्त मेरा चाहता मोहब्बत उससे कुछ नहीं।
क्या नहीं मेरे पास जो मांगू —————–।।
क्यों बेवजहां तेरी तारीफ करूँ, इस तुम्हारे रूप-ओ-सूरत की।
पूरी तरहां तू नहीं पवित्र है, करता नहीं मैं पूजा मूरत की।।
आशिक नहीं हूँ मैं तेरा, गुलाम नहीं हूँ मैं तेरा, इज्जत मेरी तुमसे कुछ नहीं।
क्या नहीं मेरे पास जो मांगू ——————–।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद, तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)




