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मेघों का मौसम – कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

छत्र मेघों का यहाँ छाया घना है।
एक एक चंदोवा सदृश फिर से तना है।1
तप्त धरती के अधर पे पपड़ियां हैं,
नीर बरसा के सभी कुछ सींचना है।2
संगठित हो वाष्प कण वारिद बनेंगे,
बादलों से पाठ हमको सीखना है।3
बूँद का ले रूप धरती पर उतरते,
योग वर्षा का अनूठा अब बना है।4
पावसी ऋतु में जलज आ चैन देते,
शुष्क मौसम को तभी तो बीतना है।5
घन घनन घन कर रही मेघावली यूँ,
दुंदुभी सा स्वर लगे पहले सुना है।6
चाहतीं शीतल फुहारें आसमानी,
मन खुशी से भर सकें जो अनमना है।7
– कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश




