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मेरी कलम से – रुचि मित्तल

सितारों से बहुत आगे निकल जाये कहीं हम तुम,
जहां अपनी मुहब्बत का बसाये अब वहीं हम तुम।
मुहब्बत का हासिल जुदाई नहीं है,
जुदा हम हुए, तो खुदाई नहीं है।
भला कैसे निभाऊ जिंदगी से रब्त मैं अपना,
कोई एहसास बाकी है न कोई आरजू अब तो।
प्यार वो धागा है जो दिलों को जोड़ देता है,
गमों के मौसमों को पीछे छोड़ देता है।
दिल को धड़कता देख कर ज़िंदा समझ लिया,
हमको मरे हुए तो ज़माने गुज़र गए।
– रुचि मित्तल, झज्जर, हरियाणा




