धर्म
“मेहंदी प्यार भरी”- अंजू लता

सुभग हथेलियां,नरम कलाई-
लाल चूड़ियां मन को भाई,
‘मेहंदी प्यार भरी’ लगवा कर-
दुल्हनिया ने रीत निभाई.
अमर सुहाग रहे वामा का-
मुस्काए चेहरा श्यामा का,
प्रीतम के दिल में बस जाए-
सुखद समां हो सफरनामा का.
रंग चटक मेहंदी का उभरा-
मन का दर्पण निखरा-सुथरा,
प्रियतम की नजरों का जादू-
चल गोरी के दिल पर गहरा.
नजरों में है नूर समाया-
पुलकित है दोनों की काया,
नेह-सुधा का पान करे है-
निर्जल-व्रत की देखो माया.
‘प्यार भरी मेहंदी’ ने रच कर-
भावों की खुशबू से भरकर,
रच डाला इतिहास सुहाना-
कहते कंगना खनक-खनककर.
जिसकी मेहंदी होती गाढ़ी-
पति-प्रेम में वही अगाड़ी,
किवदन्ती है बरसों से-
सोच-सोच बल खाए नारी.
– डा. अंजु लता सिंह गहलौत,नई दिल्ली




