मेहनत और सफलता – ज्योती कुमारी

तप के बिना कोई फल खिले—ये गीता की मधुर पुकार,
कर्म की रोशनी ही तोड़ती है भाग्य का गहरा अँधियार।
भगवान राम सिखाते हैं—संकल्प जब साँसों में बस जाए,
तो काँटों से भरा जंगल भी सीधा रास्ता बन जाए।
सुग्रीव की कथा कहती है—रसों में डूबा मन भटक जाता है,
पर त्याग का दीपक जलते ही जीवन फिर राह पाता है।
मेहनत वह दौलत है जो हर हाथ को अमीर बना देती है,
अधीरता वह छाया है जो बुद्धि का सूरज ढक देती है।
रावण की कथा बताती—विद्या व्यर्थ है, यदि धर्म साथ न हो,
अहंकार का ताज भले चमके, पर अंत में हाथ कुछ न हो।
और देखो माँझी को—प्यार, पीड़ा और जिद की जीवित मिसाल,
जिसने हर चोट में अपनी पत्नी की धड़कन का रखा खयाल।
२२ बरस तक हथौड़ी-छेनी से उसने किस्मत से जंग लड़ी,
पसीने की हर बूँद ने पहाड़ की नस-नस तक दर्द कड़ी।
दुनिया पागल कहती रही, पर उसका दिल चट्टान बना रहा,
हर वार में पत्नी की याद का अमृत-सा प्रेम रचा रहा।
मेहनत का यही सत्य है—जो रुकता नहीं, वह झुकता नहीं,
और जो चल पड़े भरोसे से—उसके लिए असंभव कुछ भी नहीं।
-ज्योती कुमारी , नवादा (बिहार)




