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राधिका जैसी वफा – ऋतु राधिका

नजरे तो मिल जाए दिल मिलते नहीं है,
दिल को मिलाने की दवा कहां से लाओगे।
भोलापन सादगी हो प्रेम हो दीवानगी हो,
ढूंढ कर ऐसी तुम अदा कहां से लाओगे।
दूर दूर रहके भी प्रेम को महान करे,
ऐसा सब्र ऐसी तुम रज़ा कहां से लाओगे।
राह देखी एक टक पल पल सांवरे की,
राधिका के जैसी तुम वफा कहां से लाओगे।
– रितु राधिका, वृंदावन, उत्तर प्रदेश




