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रुपया –  आचार्य अवधेश झा

कागज के टुकड़े से यूं हीं प्यार न होता!

अगर भरा पुरा छोटा सा अपना परिवार न होता!!

गगन तले न बहते पसीने,

न हींअथक परिश्रम होता!

अगर भरा पुरा छोटा सा•••••

न दिन दोपहरी वर्षां तों में

छलनी होता तन भी,

न हीं जेष्ठ की तपती धूपो में

विचलित होता मन भी!

मैं भी निश्चय हीं निश्चिंत

पांव पसारे सोता!!

अगर भरा पुरा छोटा सा••••

कभी कभी मन भारी रहता,

तन मन पर बीमारी रहता !

पर आलिंगन बच्चों का कर

सुख से नयन भिगोता !!

अगर भरा पुरा छोटा सा•••••

धन है बहुत जरूरी जीवन में रुपया हीं आधार है

आना जाना इस सृष्टि में

यह भी इक व्यापार है

कालचक्र में फंस कर फिर से जन्म मरण न होता

अगर भरा पुरा छोटा सा•••••

है बहुत जरूरी रुपया पैसा

धन से धर्म है होता

धन से हीं स्वास्थ्य संभलता

शिक्षा दीक्षा मिलता

धन हीं है बेरा जीवन का

फिर प्रश्न अनेको होता

अगर भरा पुरा छोटा सा••••

– आचार्य अवधेश झा

गंघटी आश्रम,धर्मागतपुर पिलखी,

मुरौल,मुजफ्फरपुर  बिहार 843121

मो•6201396745

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