वंदे भारतम.. वंदे भारतम.. – इंजी. अरुण कुमार जैन

खुली हवा में सांस ले रहे,
उनका हम पर उपकार है,
मातृभूमि पर बलिदान हुये जो,
वे ही प्रभु अवतार हैं।
वंदे भारतम.. वंदे भारतम..
रानी झाँसी निकल पड़ी थीं,
मात्र तेइस की उम्र में,
प्राण न्यौछावर करके अपने,
पूज्य बनी थीं युद्ध में.
भगत सिंह,सुखदेव, राजगुरु,
फाँसी फंदा चूम लिए,
हत्यारे का वध करके वे,
मातृभूमि हित अमर हुये.
चंद्रशेखर आजाद प्रयाग की
भूमि पर बलिदान हुये,
नहीं झुके पापी के आगे,
नयी चेतना जगा गये.
खून मुझे दो, आजादी लो,
नेताजी ने बोला था,
देश प्रेम का पावन निरझर,
हरेक हृदय में खोला था।
वंदे भारतम,.. वंदे भारतम..
बलिदान हो गये कई सैकड़ों,
जालियाँवाला बाग में,
डायर पापी ने मरवाया,
हमें यों झोंका आग में।
सावरकर जी कालापानी में,
कोल्हू से पिसते थे,
हमें सुखद कल देने खातिर,
जुल्मो सितम को सहते थे.
नहीं सैकड़ों,लाखों पुत्र, बहिन,
माता बलिदान हुये,
आँसू, पीड़ा, गहन वेदना,
वर्षों तक वे सहन किये.
पापी के अत्याचारों से,
नहीं डरे संकल्प लिए,
शीश कटाकर भारत माँ की जय जय
कहकर प्राण दिए।
वंदे भारतम… वंदे भारतम..
टुकड़े टुकड़े कर वीरों को,
निर्ममता से मारा था,
अंग भंग कर पापी ने,
घावों पर नमक लगाया था.
आँखें फोड़ी,गर्दन काँटी,
जलते शोलों पर डाल दिया,
माता बहिनों से बलात्कार,
निर्मम अत्याचार हुआ.
कितनी श्रद्धा उनको देश पर,
मर कर उन सबने बता दिया।
वंदे भारतम.. … वंदे भारतम..
इन सबके बलिदानों से ही,
स्वतंत्रता का सुमन खिला,
हमको राज सुराज मिला,
हर सुविधा है आज देश में,
घर, भोजन, आराम है,
वाहन,शिक्षा,स्वास्थ्य सभी को,
चेहरों पर मुस्कान है,
मत भूलो उनके बलिदानों से,
सुख हमने पाया है,
कोटि नयन अश्रु से सिंचित,
हर नव सुमन हमारा है.
श्रम, निष्ठा, कर्तव्य निर्वहन,
कर हम आगे जायेंगे,
भरत के भारत को हम फिर से
विश्व शिखर पर लाएंगे।
वंदे भारतम, वंदे भारतम…..
– इंजी. अरुण कुमार जैन (विभूति फीचर्स)




