मनोरंजन

वसुधा – डॉ क्षमा कौशिक

अद्भुत है परिवेश, धरा की शोभा न्यारी।

वसुधा कर शृंगार, लगे सब को अति प्यारी।।

मद्धम मद्धम धूप, हवा भी चले सुहानी।

देख मौसमी रंग, भ्रमर करते मनमानी।।

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शारदे माँ तमस मन के सारे हरो।

ज्ञान की ज्योति से भर प्रकाशित करो।

दूर संशय करो तत्व के बोध से।

भक्ति की भावना से हृदय तुम भरो।।

– डॉ क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड

 

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