राजनीतिक

विमान हादसे पर सियासत क्यों ? – डॉ. सुधाकर आशावादी 

utkarshexpress.com – संसार में नित्य ही कुछ न कुछ ऐसा घटित होता रहता है, जिस कारण निरीह नागरिकों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। कभी प्राकृतिक आपदाएं व्यक्तियों का जीवन लीलती हैं, कभी भयंकर दुर्घटनाओं में पलक झपकते ही सैकड़ों जानें चली जाती हैं। कटु सत्य यही है कि जहाँ तक संभव हो, जानबूझकर कोई मृत्यु का वरण नहीं करता। ऐसे में स्पष्ट है कि कोई भी अनहोनी पूर्व सूचना देकर नहीं आती। वैसे भी यदि अनहोनी की सूचना पूर्व ही मिल जाए, तो अनहोनी से बचाव के उपाय किए जा सकते हैं , किन्तु नियति को क्या मंजूर होता है, यह कोई नहीं जानता। अहमदाबाद में एयर इंडिया के बोइंग ड्रीमलाइनर का लंदन की उड़ान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त होना बेहद दुःख का विषय है। उच्च तकनीकी युग में लम्बी उड़ान के वायुयान का इस प्रकार से दुर्घटना ग्रस्त होना कि सभी यात्री एवं विमान के अनुभवी चालकों सहित क्रू मेंबर्स का काल के गाल में समा जाना गहन चिंता का विषय है। सर्वविदित है कि जलयान की लंबी व उबाऊ समुद्री यात्राओं की अपेक्षा लोग विमान यात्राओं को ही प्राथमिकता देते हैं। खासकर विदेश यात्राएँ वायुयान द्वारा ही सुगम सिद्ध होती हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उड़ानों के संचालन में पूर्ण सावधानी बरती ही जाती है, फिर भी ऐसी दुर्घटनाएं पीड़ित परिवारों को जीवन भर का दंश दे जाती हैं। ऐसा नहीं है कि इस दुर्घटना के कारणों की जांच नहीं होगी । जांच भी होगी तथा कारणों का खुलासा भी होगा, किन्तु जब हादसे की विभीषिका से परिवार उबर नहीं पा रहे हों, तब जांच से पूर्व ही कयास लगाकर अफवाहें फैलाकर राजनीतिक मंसूबों को हवा दी जाती है, तो लगता है, कि दुःख की घड़ी में भी कुछ लोग संवेदना व्यक्त करने की जगह मानवता को शर्मसार करने का अवसर नहीं चूकना चाहते। कौन नहीं जानता कि विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लंबी उड़ान भरने वाले वायुयानों का सुरक्षित यात्रा प्रदान करने का रिकॉर्ड रहा है। ऐसे में त्रुटिवश या अन्य किसी भी कारण से वायुयान दुर्घटनाग्रस्त हुआ है तथा उसमें ढाई सौ से अधिक यात्रियों को मौत ने निगल लिया है, तो स्थिति को संभालने अपेक्षित प्रयास जरुरी होते हैं या सत्ता नायकों के त्यागपत्र मांगने की राजनीति करना ? निसंदेह विश्व में शायद ही ऐसा कोई अन्य देश होगा, जहां मानवीय संवेदनात्मक मुद्दों पर भी संकीर्ण राजनीति की जाती हो या किसी भी दुर्घटना के संदर्भ में आधारहीन अफवाहें फैलाने का कार्य बड़े पैमाने पर किया जाता हो। इस सत्य को प्रत्येक नागरिक को स्वीकार कर लेना चाहिए, कि जांच का निष्कर्ष दूध का दूध और पानी का पानी कर देगा, यदि कोई विमान हादसे का दोषी होगा, तो अवश्य ही भारतीय दंड विधान में उसके लिए सजा भी सुनिश्चित होगी। सो भविष्य में ऐसी विमान दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हर संभव सावधानी बरतने के साथ ही क्यों न अतिरिक्त सावधानी बरती जाए, ताकि ऐसी हृदय विदारक स्थिति से बचा जा सके। (विनायक फीचर्स)

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