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विश्व विजेता बनी बेटियांँ – डॉ गीता पांडेय

सदा बेटियों ने जग में है,भारत की शान बढ़ाई।
अदम्य साहस शौर्य पराक्रम, से है पहचान बनाई।।

कई रूप इनके हैं होते, अपना फर्ज निभाती हैं।
उन्हीं बेटियों पर गर्व करूँ मै, मंजिल को जो पातीं हैं।।

मात-पिता का हाथ बँटाती, उनकी सीख सदा मानें।
ऑटो रिक्शा प्लेन चलाती, धर्म-कर्म अपना जानें।।

उर जज्बा जोश अपार लिए, लक्ष्य पंथ पर कदम बढ़ा।
किया विश्व कप को है हासिल, नव नूतन इतिहास गढ़ा।।

भारत मांँ की हर इक बेटी, जनक सुता कहलाती हैं।
सौम्य सलोना रूप सुहाना, सबके मन को भाती हैं।।

पड़ी जरूरत अगर देश को, रण चंडी बन जाती हैं।
लक्ष्मी दुर्गा काली बनकर,अरि को मार भगाती हैं।।

शेफाली दीप्ति मंधाना,स्मृति ने कौशल दिखलाया।
ऋचा रेणुका रोड्रिगेज ने,पिच पर हड़कंप मचाया।।

मनप्रीत नल्ला पुरेंडी ने,निज गौरव सुयश बढ़ाया।
जनमानस का ध्यान खींच कर,अद्भुत है खेल दिखाया।।

किया पराजित अफ्रीका को,जग में है नाम कमाया।
कुशल प्रदर्शन प्रतिभा के बल,भारत का ध्वज फहराया।।
– डॉ गीता पांडेय अपराजिता, सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश

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