मनोरंजन

शिक्षित भारत-सशक्त भारत- रश्मि शाक्य

आओ खोलें आज हम सम्भावना के द्वार.

अक्षरों  के   दीप  से   रोशन  करें  संसार।

 

जिनके हाथों से  ककहरे अब भी  छूटे हैं,

जो  अपनी  शिक्षा  के  मंदिर से अछूते हैं,

ज्ञान का उनको मिले आधार व अधिकार.

अक्षरों  के   दीप  से   रोशन  करें  संसार।

 

साक्षरता  को  मिले  विश्वास  का अब साथ,

लेखनी से हो सुशोभित अब यहाँ हर हाथ,

विश्व  के  व्यक्तित्व का शिक्षा बने श्रृंगार.

अक्षरों  के   दीप  से    रोशन   करें   संसार।

 

आत्मगौरव का बने शिक्षा सहज उन्वान,

अस्मिता का भान हो ख़ुद की बने पहचान,

नित्य ही सामर्थ्य को उपलब्ध हो विस्तार.

अक्षरों  के   दीप  से   रोशन  करें  संसार।

-रश्मि शाक्य, गाजीपुर, उत्तर प्रदेश

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