सच सच बताओ क्या तुम – गुरुदीन वर्मा

सच सच बताओ, क्या तुम कल भी, हमसे मिलोगे सच ऐसे।
यह भी बताओ, क्या कल भी बातें, हमसे करोगे सच ऐसे।।
भूल तो नहीं जावोगे, दूर तो नहीं जावोगे, धोखा तो नहीं करोगे हमसे।
सच सच बताओ क्या तुम—————।।
देखो जरा उनको, उनके खेल-ओ-मस्ती, कितने आजाद है वो गुल।
आसमां को वो चले हैं, भूलकर वो यह जमीं, कर रहे हैं वो भूल।।
वादा करो तुम, कल नहीं बदलोगे, पाकर दौलत सच ऐसे।
भूल तो नहीं जावोगे, दूर तो नहीं जावोगे, धोखा तो नहीं करोगे हमसे।
सच सच बताओ क्या तुम—————।।
तुम कहीं भी रहो, बस यही है गिला, भूलना मत रस्में निभाना।
निभाऊंगा मैं भी मुसीबत में वादा, दर्द मेरा तुम भी समझना।।
नजर तुम मिलाओ, क्या यह रिश्ता, कल भी रहेगा सच ऐसे।
भूल तो नहीं जावोगे, दूर तो नहीं जावोगे, धोखा तो नहीं करोगे हमसे।
सच सच बताओ क्या तुम—————-।।
क्या पैसा ही सब कुछ है, वतन कुछ भी नहीं है, तुम यह बतावो।
महल जो बनावोगे, वह नहीं होगा स्वर्ग, मानवता को मत भुलावो।।
हमको बताओ, क्या यह मिलन तुम, याद रखोगे कल सच ऐसे।
भूल तो नहीं जावोगे, दूर तो नहीं जावोगे, धोखा तो नहीं करोगे हमसे।
सच सच बताओ क्या तुम—————।।
– गुरुदीन वर्मा आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां (राजस्थान)




