सावन के सोमवार – गुरुदीन वर्मा

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(शेर)- आया है सावन का महीना, आवो चले शिव के दरबार।
शिव की आराधना से ही, होंगे सभी के सपनें साकार।।
बहुत दयावान और कल्याणकारी, जग में भोलेनाथ है।
मांगें शिव सा वर नारी, करके व्रत सावन के सोमवार।।
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सावन के सोमवार, बाबा भोले के दरबार।
लो चली भक्तों की टोली, करती जय जयकार।।
जय जय शम्भू , हर हर महादेव।
जय जय शम्भू, हर हर महादेव।।
सावन के सोमवार——————।।
महादेव सा मांगें वर, नारी अपने जीवन में।
करती हर सोमवार का व्रत, नारी हर सावन में।।
हाँ,चली करने दर्शन, बाबा भोले के दरबार।
लेकर पूजा की थाली, करती जय जयकार।।
जय जय शम्भू , हर हर महादेव।
जय जय शम्भू, हर हर महादेव।।
सावन के सोमवार—————।।
मिलती है सुख-समृद्धि, करने से शिव की पूजा।
कल्याणकारी और दयावान, नहीं कोई शिव के दूजा।।
हाँ, चले लेकर मिन्नत, बाबा भोले के दरबार।
जल-दूध,फल हाथ लिये, करते जय जयकार।।
जय जय शम्भू , हर हर महादेव।
जय जय शम्भू, हर हर महादेव।।
सावन के सोमवार—————।।
की थी तपस्या पार्वती ने, शिव पाने को सावन में।
शिव ने बनाया जीवनसाथी, पार्वती को सावन में।।
चले लगाकर माथे पे भस्म, बाबा भोले के दरबार।
गाते-बजाते- नाचते, करते जय जयकार।।
जय जय शम्भू , हर हर महादेव।
जय जय शम्भू, हर हर महादेव।।
सावन के सोमवार—————।।
– गुरुदीन वर्मा.आज़ाद
तहसील एवं जिला-बारां(राजस्थान)




