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सिपाही है खड़े सीमा के – रीता गुलाटी

जान हाजिर कर वो देते देश इज्जत के लिये,
सौंप देते है सभी कुछ अब शहादत के लिये।
हम करेगे आज वीरो की शहादत याद भी,
छोड़ देते घर भी अपना बस हुकूमत के लिये।
हो गये कुर्बान देखो आज सैनिक देश के,
है नमन सौ सौ शहीदों की शहादत के लिये।
दाद सारे दे रहे वीरो की हिम्मत देख कर,
रात दिन पहरा दिये सीमा सलामत के लिये।
प्यार करते हैं वतन से,ढूँढते खुशियाँ बड़ी,
बन सिपाही है खड़े सीमा हिफाजत के लिये/।
– रीता गुलाटी ऋतंभरा, चण्डीगढ़




